विजय सरकार का यू-टर्न: छात्रों को प्रदर्शन से रोकने वाला आदेश वापस, सियासत गरम

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने छात्रों के प्रदर्शन और आंदोलनों में शामिल होने को लेकर जारी अपने विवादित निर्देश को वापस ले लिया है। सरकार के इस फैसले को हालिया राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है।

दरअसल, उच्च शिक्षा विभाग की ओर से ऐसा निर्देश जारी किया गया था, जिसमें सरकारी कला एवं विज्ञान महाविद्यालयों के छात्रों और युवाओं को कुछ राजनीतिक संगठनों से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में भाग लेने से रोकने के लिए समन्वित कार्रवाई की बात कही गई थी। इस निर्देश के सामने आने के बाद विपक्ष और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से सवाल उठाए गए।

आलोचकों ने इसे छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जोड़कर देखा। बढ़ते विवाद के बीच तमिलनाडु सरकार ने अब अपने पहले के निर्देश को वापस लेने का फैसला किया है।

छात्रों के प्रदर्शन पर बदला फैसला

सरकार के इस कदम से यह साफ संकेत मिलता है कि छात्र आंदोलनों को लेकर अपनाया गया पिछला रुख अब बरकरार नहीं रहेगा। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब तमिलनाडु में NEET समेत शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की सक्रियता लगातार चर्चा में है।

इससे पहले विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) सरकार NEET को पूरी तरह समाप्त करने की मांग भी उठा चुकी है। पार्टी ने शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने की मांग को भी अपने प्रमुख एजेंडे में शामिल किया है।

NEET प्रदर्शन से भी जुड़ा है मामला

तमिलनाडु में NEET के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार पहले ही नरम रुख दिखा चुकी है। अगस्त की शुरुआत में सरकार ने NEET के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की घोषणा की थी।

ऐसे में छात्रों को प्रदर्शनों में भाग लेने से रोकने वाला निर्देश वापस लेना विजय सरकार की शिक्षा और छात्र आंदोलनों से जुड़ी नीति में एक और महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

Khabrein की नजर: सरकार के इस यू-टर्न के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक आंदोलनों को लेकर तमिलनाडु सरकार आगे क्या रुख अपनाती है।

Exit mobile version