हृदय रोग का बढ़ता खतरा: तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ता कोलेस्ट्रॉल बना रहे हैं दिल के सबसे बड़े दुश्मन

नई दिल्ली: भारत में हृदय रोग (Cardiovascular Disease) अब केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता मानसिक तनाव, लंबे समय तक बैठकर काम करना, खराब खान-पान, धूम्रपान और मोटापे के कारण युवाओं में भी हार्ट अटैक और हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियां दुनिया में मौत का सबसे बड़ा कारण बनी हुई हैं। भारत में भी हृदय रोग कुल मौतों का लगभग एक बड़ा हिस्सा बन चुके हैं और इनमें हाई ब्लड प्रेशर सबसे प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।

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भारत में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

  

विशेषज्ञों के अनुसार भारतीयों में दिल की बीमारियां कई विकसित देशों की तुलना में कम उम्र में देखने को मिल रही हैं। इसके पीछे कई कारण हैं।

प्रमुख कारण

ICMR के अनुसार हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य लिपिड प्रोफाइल और मधुमेह भारत में हृदय रोग के सबसे बड़े जोखिम कारकों में शामिल हैं।

चौंकाने वाले आंकड़े

तथ्य

स्थिति

भारत में हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित लोग

लगभग 22 करोड़

नियंत्रित ब्लड प्रेशर वाले मरीज

केवल लगभग 12%

30 वर्ष से ऊपर के लोगों की स्क्रीनिंग

सरकारी कार्यक्रम के तहत उपलब्ध

हृदय रोग

भारत में प्रमुख मृत्यु कारणों में शामिल

हाई ब्लड प्रेशर: साइलेंट किलर

 

अधिकांश लोगों को हाई ब्लड प्रेशर का पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।

सामान्य स्तर

श्रेणी

रक्तचाप

सामान्य

120/80 mmHg से कम

बढ़ा हुआ

120-129

हाइपरटेंशन

130/80 या उससे अधिक (कई अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार)

लगातार बढ़ा हुआ रक्तचाप नुकसान पहुंचा सकता है।

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