Khalifa Movie Review: पृथ्वीराज सुकुमारन का स्वैग दमदार, लेकिन कमजोर कहानी ने बिगाड़ा खेल

Khalifa Movie Review in Hindi: मलयालम सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘खलीफा’ (Khalifa) 20 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। बड़े बजट, जबरदस्त एक्शन और स्टार पावर के साथ आई इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं। निर्देशक वैसाख की यह फिल्म पर्दे पर स्टाइल और एक्शन का भरपूर प्रदर्शन करती है, लेकिन कमजोर और काफी हद तक अनुमान लगाने योग्य कहानी इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है।
गोल्ड स्मगलिंग की दुनिया में ‘खलीफा’
फिल्म की कहानी गोल्ड स्मगलिंग और मंबरक्कल परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है। पृथ्वीराज सुकुमारन फिल्म में आमिर अली की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि मोहनलाल उनके दादा मंबरक्कल अहमद अली के किरदार में दिखाई देते हैं।
फिल्म अपराध, परिवार, बदले और सत्ता की कहानी को बड़े कैनवास पर पेश करने की कोशिश करती है। एक्शन सीक्वेंस और भव्य लोकेशंस फिल्म को विजुअली आकर्षक बनाते हैं, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के साथ कई मोड़ जाने-पहचाने लगने लगते हैं।
पृथ्वीराज सुकुमारन का दमदार अंदाज
‘खलीफा’ की सबसे बड़ी ताकत पृथ्वीराज सुकुमारन की स्क्रीन प्रेजेंस है। उनका स्टाइल, एक्शन और किरदार का एटीट्यूड फिल्म के कई दृश्यों को प्रभावशाली बनाता है। खासकर उनके एंट्री सीक्वेंस को दर्शकों से तारीफ मिली है। सोशल मीडिया पर जेक्स बिजॉय के बैकग्राउंड स्कोर की भी काफी चर्चा हो रही है।
तकनीकी स्तर पर भी फिल्म मजबूत नजर आती है। बड़े एक्शन सीक्वेंस, सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड म्यूजिक इसे एक बड़े पर्दे वाली ‘मास एंटरटेनर’ फील देते हैं।
मोहनलाल की मौजूदगी बनी खास आकर्षण
फिल्म में मोहनलाल की मौजूदगी इसके सबसे चर्चित पहलुओं में से एक है। हालांकि पहले से ही संकेत दिए गए थे कि पहले भाग में उनके किरदार का मुख्य रूप से परिचय कराया जाएगा और उनकी कहानी भविष्य में ज्यादा विस्तार पा सकती है।
ऐसे में दर्शकों को मोहनलाल से जितने लंबे स्क्रीन टाइम की उम्मीद हो सकती है, वह यहां नहीं मिलता। इसके बावजूद उनकी मौजूदगी फिल्म के बड़े सिनेमाई पलों में से एक बनती है।
कमजोर कहानी बनी सबसे बड़ी परेशानी
जहां ‘खलीफा’ अपने विजुअल्स और स्टार पावर के दम पर प्रभावित करती है, वहीं इसकी पटकथा फिल्म को पीछे खींचती है। कहानी में कई ऐसे मोड़ आते हैं जिनका अंदाजा दर्शक पहले ही लगा सकते हैं।
फिल्म को लेकर सामने आई शुरुआती समीक्षाओं में भी यही बात प्रमुखता से दिखाई देती है। एक तरफ पृथ्वीराज की स्क्रीन प्रेजेंस, एक्शन और बैकग्राउंड स्कोर की तारीफ हो रही है, वहीं दूसरी ओर कमजोर लेखन, प्रेडिक्टेबल कहानी और भावनात्मक जुड़ाव की कमी को लेकर आलोचना की गई है।
क्या सिनेमाघर में देखने लायक है ‘खलीफा’?
अगर आप पृथ्वीराज सुकुमारन के प्रशंसक हैं और बड़े पर्दे पर स्टाइलिश एक्शन, दमदार BGM और भव्य विजुअल्स देखना पसंद करते हैं, तो ‘खलीफा’ आपको कुछ अच्छे सिनेमाई पल दे सकती है।
लेकिन यदि आप एक कसी हुई क्राइम थ्रिलर और अप्रत्याशित कहानी की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो फिल्म निराश कर सकती है। ‘खलीफा’ के पास स्टार पावर और तकनीकी चमक तो भरपूर है, लेकिन कहानी उसी स्तर का साथ नहीं दे पाती।
रेटिंग: 2.5/5




