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खाद्य तेल की कीमतों में उछाल: त्योहारी सीजन से पहले आम आदमी की जेब पर असर, महाराष्ट्र में खुले तेल पर बैन

Khabrein.in | नई दिल्ली: भारत में खाद्य तेल (Edible Oil) की बढ़ती कीमतें आम जनता और घरेलू बजट के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गई हैं। पिछले एक साल में खाद्य तेलों के दाम 12 से 15 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। आगामी त्योहारी और शादी के मौसम को देखते हुए मांग में होने वाली बढ़ोतरी के कारण फिलहाल कीमतों में राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
आयात में भारी बढ़ोतरी और नया टैरिफ
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेल विदेशों से आयात करता है। त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने के लिए रिफाइनरों ने खरीद तेज कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत का खाद्य तेल आयात 33.3% बढ़कर 14.81 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक है। इसमें मुख्य रूप से पाम तेल (लगभग 48-50% की वृद्धि) और सोयाबीन तेल (31% की वृद्धि) के आयात में जबरदस्त उछाल देखा गया।
इस बीच, भारत के वित्त मंत्रालय ने 15 अगस्त 2026 से विभिन्न खाद्य तेलों के लिए टैरिफ मूल्यों में संशोधन किया है। नए नियमों के तहत क्रूड पाम ऑयल के टैरिफ मूल्य में 3 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की कटौती की गई है, जबकि आरबीडी (RBD) पाम ऑयल में 8 डॉलर और क्रूड सोयाबीन तेल के टैरिफ में 2 डॉलर प्रति मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा विनिमय दर (Exchange Rate) में भी ₹97.20 से ₹96.05 प्रति अमेरिकी डॉलर का बदलाव किया गया है, जिससे आयात शुल्क की गणना में भी परिवर्तन आया है।
महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला: खुले तेल की बिक्री पर रोक
खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने 20 अगस्त 2026 को एक अहम आदेश जारी कर पूरे राज्य में खुले (बिना पैकेजिंग वाले) खाद्य तेल और फैट (fats) की बिक्री पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया है। यह नियम ऑयल एक्सपेलर, रिफाइनर, थोक विक्रेता, ट्रांसपोर्टर, रिटेलर और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सहित पूरी सप्लाई चेन पर सख्ती से लागू होगा।
महंगाई दर पर पड़ रहा है सीधा असर
खाद्य तेल की यह महंगाई ऐसे समय में बढ़ रही है जब देश की खुदरा महंगाई दर भी ऊपर जा रही है। जून में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई 4.38 फीसदी थी, जो जुलाई में बढ़कर 4.45 फीसदी हो गई है। वैश्विक बाजार में तेजी, माल ढुलाई की बढ़ती लागत और रुपये की कमजोरी के कारण घरेलू बाजारों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
आगे क्या हैं उम्मीदें?
देश में तिलहन की बुवाई का रकबा बढ़ा है और कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 7 अगस्त 2026 तक यह 1.8 करोड़ हेक्टेयर तक पहुंच गया था। हालांकि, नई फसल (नवंबर तक) के बाजार में आने से पहले कीमतों में तुरंत किसी बड़ी गिरावट की संभावना कम ही मानी जा रही है। ऐसे में आगामी त्योहारी सीजन के दौरान आम जनता को खाद्य तेलों के लिए अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करनी पड़ सकती है।




