तापमान 33.9°C और हाई ह्यूमिडिटी: दिल्ली में वायरल और डेंगू का खतरा, मौसम विभाग की बारिश की भविष्यवाणी

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मानसूनी गतिविधियों के बीच मौसम का मिजाज सुहाना बना हुआ है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में अधिकतम तापमान 33.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक आसमान में बादल छाए रहने, हल्की से मध्यम बारिश और कुछ इलाकों में छिटपुट बौछारें पड़ने की संभावना जताई है।
मौसम का हाल और तापमान के आंकड़े
मौसम विभाग के अनुसार, सफदरजंग मौसम केंद्र पर अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास दर्ज किया गया, जिससे शहरवासियों को उमस भरी गर्मी से काफी राहत मिली है। हवा में आर्द्रता (Humidity) का स्तर उच्च बना हुआ है।
मौसम विभाग (IMD) का पूर्वानुमान
IMD के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत में मानसूनी हवाओं की सक्रियता के कारण दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग क्षेत्रों में बिखरी हुई (Isolated) हल्की बारिश देखने को मिल सकती है।
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तापमान की स्थिति: सोमवार को दिन के समय अधिकतम तापमान 34°C के आसपास रहने की संभावना है, जबकि न्यूनतम तापमान 25°C से 26°C के बीच बना रहेगा।
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हवा में नमी (Humidity): सुबह और शाम के समय हवा में आर्द्रता का स्तर अधिक दर्ज किया गया है। नमी का स्तर 80% से 90% के बीच रहने के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ सकता है।
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बारिश का अलर्ट: हल्की बारिश से तापमान में थोड़ी गिरावट तो आएगी, लेकिन उच्च नमी के कारण “रियल-फील” (अहसास होने वाला तापमान) थोड़ा अधिक महसूस हो सकता है।
बदलते मौसम का स्वास्थ्य पर प्रभाव (Health Effects)
तापमान में गिरावट और हवा में उच्च नमी (High Humidity) के इस संयोजन का मानव स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
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सीजनल फ्लू और वायरल इन्फेक्शन: मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और गले में खराश के मामले बढ़ते हैं।
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मच्छर जनित बीमारियां: बारिश और पानी के ठहराव से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा बढ़ जाता है। अपने आसपास पानी जमा न होने दें।
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पाचन संबंधी समस्याएं: मानसून के दौरान दूषित पानी और बाहर के भोजन से पेट का संक्रमण (Gastroenteritis) और टाइफाइड होने का जोखिम अधिक रहता है। हमेशा उबला या फ़िल्टर किया हुआ पानी पिएं।
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त्वचा और सांस के मरीज: हवा में नमी बढ़ने से फंगल इन्फेक्शन और दमा (Asthma) के मरीजों की सांस की तकलीफ बढ़ सकती है।

