Honda Cost Cutting: सप्लायर्स से कीमत घटाने को कहा, 2030 तक $9.4 अरब बचाने का लक्ष्य
Honda ने अपनी लागत घटाने के लिए सप्लायर्स पर बड़ा दबाव डालना शुरू किया है। Honda Cost Cutting योजना के तहत कंपनी अपने प्रमुख सप्लायर्स से ऑटो पार्ट्स की कीमतों में भारी कटौती चाहती है। Reuters की रिपोर्ट और आंतरिक दस्तावेजों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, कंपनी का लक्ष्य 2030 तक करीब 1.5 ट्रिलियन येन यानी लगभग 9.4 अरब डॉलर की बचत करना है।
यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब Honda लागत और इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रही है। कंपनी ने 2026 के वसंत में अपने प्रमुख सप्लायर्स के साथ बैठकें की थीं और प्रत्येक कंपनी के लिए अलग-अलग लागत कटौती लक्ष्य तय किए थे।
Honda Cost Cutting में इन पार्ट्स पर खास फोकस
Honda की लागत घटाने की योजना मुख्य रूप से तीन श्रेणियों पर केंद्रित है:
- प्रेस्ड और फोर्ज्ड कंपोनेंट्स
- इलेक्ट्रिकल पार्ट्स
- सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल्स से जुड़े पार्ट्स
रिपोर्ट के अनुसार Honda अपने सप्लायर्स से केवल कीमत कम करने की मांग नहीं कर रही, बल्कि पार्ट्स की सोर्सिंग प्रक्रिया की दोबारा समीक्षा करने को भी कह रही है। कंपनी अधिक standardized parts के इस्तेमाल और दूसरे व तीसरे स्तर के सप्लायर्स से सोर्सिंग बढ़ाने पर भी विचार कर रही है।
चीन से सोर्सिंग बढ़ाने की तैयारी
Honda Cost Cutting रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा चीन से ज्यादा कंपोनेंट्स हासिल करना भी है। Reuters के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि Honda अपने सप्लायर नेटवर्क में चीन से सोर्सिंग बढ़ाने पर विचार कर रही है।
इसके पीछे मुख्य उद्देश्य उत्पादन लागत को उन चीनी वाहन निर्माताओं के करीब लाना है, जिनकी लागत संरचना अधिक vertically integrated होने के कारण प्रतिस्पर्धी मानी जा रही है।
EV कारोबार पर बढ़ता दबाव
Honda की यह पहल कंपनी के इलेक्ट्रिक वाहन कारोबार में बढ़ते नुकसान के बीच आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, Honda को उम्मीद है कि उसके EV कारोबार से होने वाला नुकसान 12 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है। इसमें टैरिफ लागत और उत्तरी अमेरिका में कुछ मॉडल रद्द किए जाने का असर भी शामिल है, जबकि चीनी वाहन निर्माताओं से बढ़ती कीमत प्रतिस्पर्धा भी एक प्रमुख चुनौती बताई गई है।
Honda की लागत घटाने की कोशिश का मकसद केवल सप्लायर भुगतान कम करना नहीं, बल्कि कंपनी की पूरी उत्पादन लागत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तय किए गए कुछ लागत कटौती लक्ष्य इतने बड़े हैं कि सप्लायर्स के लिए उन्हें हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सप्लायर्स और कार बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
Honda Cost Cutting का तत्काल असर सप्लायर कंपनियों पर पड़ सकता है, क्योंकि उन्हें कम कीमत पर पार्ट्स उपलब्ध कराने और अपनी sourcing रणनीति बदलने के लिए कहा जा रहा है। लंबे समय में इसका उद्देश्य Honda की उत्पादन लागत कम करना और कंपनी को कम लागत वाले चीनी प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि Honda की इस पूरी योजना से भविष्य में वाहनों की खुदरा कीमतों में कितनी कमी आएगी। उपलब्ध रिपोर्ट मुख्य रूप से कंपनी की उत्पादन लागत और सप्लायर लागत घटाने की रणनीति पर केंद्रित है।
Khabrein.in का निष्कर्ष
Honda Cost Cutting योजना बताती है कि वैश्विक ऑटो उद्योग में कीमत और उत्पादन लागत की प्रतिस्पर्धा कितनी महत्वपूर्ण हो चुकी है। 2030 तक 9.4 अरब डॉलर बचाने का लक्ष्य बड़ा है, लेकिन इसे हासिल करने के लिए सप्लायर कीमतों, पार्ट्स standardization और sourcing में व्यापक बदलाव करने पड़ सकते हैं।
