सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा रविवार को दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में बड़ा हादसा बन गया। पांच मंजिला इमारत के ढहने से कई लोग मलबे में फंस गए। उपलब्ध ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 3 लोगों की मौत हुई है और 9 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है, जबकि बचाव अभियान अभी जारी है।
यह इमारत सत्य निकेतन इलाके में छात्र आवास/बॉयज PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही थी। हादसे की सूचना करीब दोपहर 1:30 बजे मिली, जिसके बाद दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस, NDRF और अन्य आपदा राहत एजेंसियां मौके पर पहुंचीं।
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा सामने आने के बाद मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए बड़े स्तर पर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। दमकल की कई गाड़ियां और विभिन्न एजेंसियों की टीमें घटनास्थल पर तैनात हैं।
रिपोर्टों के अनुसार ढही इमारत को ‘Hostel Daze’ के नाम से जाना जाता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक हादसे से पहले बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम चल रहा था। हालांकि, इमारत गिरने की अंतिम वजह की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
3 की मौत, 9 लोग मलबे से निकाले गए
ताजा रिपोर्ट के अनुसार इस सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में तीन लोगों की जान गई है और नौ लोगों को रेस्क्यू किया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है।
बचाव दल मलबे के अलग-अलग हिस्सों में लगातार तलाशी ले रहे हैं। इससे पहले अधिकारियों ने बताया था कि मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या स्पष्ट नहीं थी और कुछ लोग मोबाइल फोन के जरिए मदद मांग रहे थे।
CM रेखा गुप्ता और L-G मौके पर
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटनास्थल का जायजा लिया और राहत एवं बचाव अभियान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने भी संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ तेजी से राहत कार्य सुनिश्चित करने को कहा।
दिल्ली सरकार ने घटना की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की है। प्रशासन की ओर से आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी एहतियाती कदम उठाए गए हैं।
हादसे की वजह पर जांच
प्रारंभिक जानकारी में बेसमेंट में चल रहे निर्माण/मरम्मत कार्य का उल्लेख सामने आया है। NDMC के एक अधिकारी ने संभावित अनधिकृत खुदाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं, लेकिन इसे हादसे की अंतिम वजह नहीं माना जा सकता।
सत्य निकेतन दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक स्थित घनी आबादी वाला इलाका है, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इसी वजह से हादसे के बाद बड़ी संख्या में छात्र और स्थानीय लोग घटनास्थल पर पहुंचे।
बेसमेंट में काम के दौरान हुआ हादसा?
स्थानीय लोगों और अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय बेसमेंट में निर्माण कार्य चल रहा था। कुछ स्थानीय लोगों ने कमजोर नींव और निर्माण कार्य को संभावित कारण बताया है, लेकिन प्रशासन की ओर से अभी किसी कारण को अंतिम रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित इलाका है, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इसलिए सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा सामने आने के बाद इलाके में चिंता का माहौल है।
Khabrein.in का निष्कर्ष
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों की निगरानी से जुड़े गंभीर सवाल सामने लाता है। फिलहाल प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की है। हादसे की वास्तविक वजह और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
