किसानों और कारोबारियों को बड़ी राहत: अब वैश्विक बाजार में फिर से पहुंचेगा भारतीय गेहूं और आटा

देश में खाद्य बाजार से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। एक तरफ जहां चीनी के मोर्चे पर बाजार में हलचल और तमाम चिंताएं बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार ने देश के किसानों और कारोबारियों को बड़ी राहत देते हुए गेहूं और इससे जुड़े उत्पादों के निर्यात (Export) पर पिछले 4 साल से लगी पाबंदियों को हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, गेहूं, ड्यूरम गेहूं के साथ-साथ गेहूं के आटे (Atta), मैदा (Maida), सूजी/रवा (Semolina) और होलमील आटे के निर्यात को ‘प्रतिबंधित’ (Prohibited) श्रेणी से हटाकर तुरंत प्रभाव से ‘मुक्त’ (Free) श्रेणी में डाल दिया गया है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं और आटे की पहुंच फिर से सुनिश्चित होगी।

चार साल पहले क्यों लगाई गई थी रोक?

गौरतलब है कि साल 2022 की शुरुआत में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य आपूर्ति श्रृंखला बुरी तरह प्रभावित हुई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेंहू के दाम करीब 40 फीसदी तक उछल गए थे, जिसके बाद देश में घरेलू कीमतों को नियंत्रण में रखने और आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए मई 2022 में सरकार ने गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया था। इसके कुछ महीनों बाद अगस्त 2022 में गेहूं के आटे, मैदा और सूजी के निर्यात पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई थी।

किसानों के हितों और बंपर पैदावार को देखते हुए लिया गया फैसला

खाद्य मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस बार घरेलू स्तर पर गेहूं का बंपर उत्पादन हुआ है। देश में रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन और केंद्रीय पूल में पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध होने के कारण सरकार ने यह कड़ा प्रतिबंध हटाने का व्यावहारिक कदम उठाया है।

इस पूरे मामले पर केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा (Food Secretary Sanjeev Chopra) ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि एक्सपोर्ट से जुड़े इन प्रतिबंधों को पूरी तरह से किसानों के हित में हटाया गया है।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा का बयान:

“घरेलू बाजार में वर्तमान में गेहूं की कीमतें कुछ हद तक depressed (कम) चल रही हैं, जिससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा था। निर्यात खुलने से घरेलू बाजार में कीमतें संतुलित होंगी, किसानों को उनकी मेहनत का बेहतर दाम मिलेगा और आगामी रबी सीजन की बुआई के लिए वे प्रोत्साहित होंगे।”

इसके साथ ही, खाद्य सचिव ने देश में खाद्यान्न की उपलब्धता पर जोर देते हुए आश्वस्त किया कि भारत के पास पर्याप्त और बंपर स्टॉक मौजूद है, जो देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए पूरी तरह से मुस्तैद है।

अर्थव्यवस्था और कारोबारियों पर प्रभाव

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