शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट, Sensex 374 अंक टूटा; West Asia तनाव और महंगा तेल बना दबाव
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बाजारों में कमजोरी और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की धारणा पर दबाव डाला।
बीएसई सेंसेक्स 373.93 अंक यानी 0.49% गिरकर 76,570.35 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान सेंसेक्स एक समय 808.56 अंक तक फिसलकर 76,135.72 पर पहुंच गया। एनएसई निफ्टी भी 141.35 अंक यानी 0.59% टूटकर 23,914.45 पर बंद हुआ।
शेयर बाजार पर West Asia तनाव का असर
शेयर बाजार में बिकवाली का प्रमुख कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ता जोखिम और पश्चिम एशिया में जारी तनाव रहा। तेल की कीमतों में तेजी ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। Brent crude 0.40% चढ़कर 95.13 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि महंगा क्रूड आयात लागत और महंगाई से जुड़ी चिंताओं को बढ़ा सकता है। इसी वजह से बाजार में risk-off माहौल देखने को मिला।
किन शेयरों में ज्यादा दबाव रहा?
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में Asian Paints, HDFC Bank, Mahindra & Mahindra, HCL Tech, Bharat Electronics और Infosys प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहे। दूसरी ओर Adani Ports, Bajaj Finserv, Power Grid, NTPC और Titan बढ़त के साथ बंद हुए।
क्षेत्रीय सूचकांकों में Auto सेक्टर 1.68% गिरा, जबकि IT इंडेक्स में 1.17% की कमजोरी रही। दूसरी तरफ Energy, Utilities, Power, Realty, Services, Housing Finance और PSU Bank इंडेक्स बढ़त में रहे।
वैश्विक बाजारों में भी कमजोरी
विदेशी संकेत भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक नहीं रहे। दक्षिण कोरिया का Kospi 3.99% और जापान का Nikkei 225 2.85% गिरा। शंघाई और हांगकांग के प्रमुख सूचकांक भी नुकसान में बंद हुए। यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी देखी गई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण विभिन्न asset classes में risk-off sentiment बढ़ा। ऊंची क्रूड कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में वृद्धि ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को और प्रभावित किया।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
फिलहाल बाजार की दिशा पर पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजारों का रुख महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकते हैं। मंगलवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में 1,143.38 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी, लेकिन बुधवार को घरेलू बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली।
Khabrein.in का निष्कर्ष
भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट से साफ है कि वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम और तेल की कीमतें फिलहाल निवेशकों की चिंता के प्रमुख कारण हैं। आगे बाजार की चाल पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों सहित वैश्विक संकेतों पर निर्भर रहेगी।
