‘गांधारी’ रिव्यू: तापसी पन्नू की दमदार एक्शन के बावजूद भावनाओं की कमी खलती है
‘गांधारी’—Netflix पर तापसी पन्नू की फिल्म को लेकर सामने आई समीक्षाओं में इसकी कहानी और एक्शन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। Gandhari Review की बात करें तो फिल्म एक ऐसी मां की कहानी है, जिसकी बेटी का अपहरण हो जाता है और उसे खोजने की कोशिश में वह खुद अस्थायी रूप से अपनी आंखों की रोशनी खो देती है। फिल्म का निर्देशन देवाशीष मखीजा ने किया है, जबकि कहानी, स्क्रीनप्ले और संवाद कनिका ढिल्लों से जुड़े हैं।
फिल्म में तापसी पन्नू के साथ इश्वाक सिंह, जतिन सरना, प्रशांत नारायणन, छाया कदम और मीता वशिष्ठ प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
गांधारी रिव्यू: क्या है फिल्म की कहानी?
कहानी की शुरुआत बानी (तापसी पन्नू) और उसके परिवार से होती है। ट्रेन यात्रा के दौरान उसकी बेटी गायब हो जाती है। बेटी को बचाने की कोशिश में बानी घायल हो जाती है और उसकी आंखों की रोशनी कुछ समय के लिए चली जाती है।
बेटी की तलाश के दौरान बानी को काल्पनिक बंगाली कस्बे जॉयपुर्रा की ऐसी दुनिया का सामना करना पड़ता है, जहां कई लड़कियों के गायब होने का मामला सामने आता है। पुलिस की मदद पर्याप्त नहीं मिलने पर वह खुद अपनी बेटी की तलाश में जुट जाती है।
एक्शन मजबूत, लेकिन भावनात्मक असर कमजोर
गांधारी रिव्यू का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट इसका एक्शन है। फिल्म में जैसे ही बानी खुद अपनी बेटी को तलाशने का फैसला करती है, कहानी में तेजी आती है और उसका संघर्ष अधिक प्रभावशाली नजर आता है।
लेकिन फिल्म की भावनात्मक नींव उतनी मजबूत नहीं बन पाती। समीक्षा के मुताबिक मां-बेटी के रिश्ते को दर्शाने के लिए फिल्म शुरुआत में पर्याप्त समय नहीं देती, इसलिए बाद में बानी की बेचैनी और संघर्ष दर्शकों पर उतना गहरा असर नहीं छोड़ते।
तापसी पन्नू की परफॉर्मेंस कैसी है?
तापसी पन्नू ने बानी के किरदार में शारीरिक रूप से चुनौतीपूर्ण एक्शन दृश्यों को प्रभावी ढंग से निभाया है। हालांकि, किरदार की पृष्ठभूमि और भावनात्मक परतें पूरी तरह विकसित नहीं होने के कारण उनका अभिनय हर जगह समान प्रभाव नहीं छोड़ता।
प्रशांत नारायणन का किरदार कहानी में देर से उभरता है और खलनायक के रूप में अपेक्षित प्रभाव पैदा नहीं कर पाता। इश्वाक सिंह, छाया कदम और मीता वशिष्ठ अपने-अपने हिस्से में ठीक नजर आते हैं।
कहानी की कमजोर कड़ियां
फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी पटकथा में दिखाई देती है। जॉयपुर्रा को रहस्यमय और मुश्किल जगह के तौर पर पेश किया जाता है, लेकिन कहानी आगे बढ़ने के दौरान बानी का वहां के लोगों और रहस्यों से अपेक्षाकृत आसानी से जुड़ जाना कुछ घटनाओं को सुविधाजनक बना देता है।
सस्पेंस को बनाए रखने की कोशिश के बावजूद फिल्म का क्लाइमेक्स भी जरूरत से ज्यादा लंबा महसूस होता है। संगीत और बैकग्राउंड में भावनाओं को बहुत स्पष्ट तरीके से उभारने की कोशिश भी कहानी के असर को बढ़ाने के बजाय कई जगह उसे कम करती है।
Khabrein.in का निष्कर्ष
गांधारी रिव्यू का निष्कर्ष यही है कि फिल्म में एक मजबूत मां, खतरनाक तलाश और एक्शन-थ्रिलर की पर्याप्त सामग्री मौजूद है, लेकिन कमजोर पटकथा और सीमित भावनात्मक गहराई इसकी बड़ी कमियां बन जाती हैं। तापसी पन्नू एक्शन में प्रभाव छोड़ती हैं, मगर फिल्म दर्शकों को बानी के दर्द से उतना गहराई से जोड़ नहीं पाती। Hindustan Times की समीक्षा ने फिल्म को 2.5/5 की रेटिंग दी है।



